राज्यसभा में डॉ. मेनका के बयान पर हंगामा, उपसभापति ने बीच में रोका

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नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट (न्यायाधीशों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पर राज्यसभा में चर्चा के दौरान संसद सदस्य एवं वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. मेनका गुरुस्वामी के वक्तव्य पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। भाषण के दौरान उन्होंने न्यायाधीशों की नियुक्ति प्रक्रिया और न्यायपालिका में प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर सवाल उठाए, जिसके बाद उपसभापति ने उन्हें विषय तक सीमित रहने की सलाह देते हुए आगे बोलने से रोक दिया।
राज्यसभा सदस्य डॉ. मेनका गुरुस्वामी ने अपने संबोधन में आरोप लगाया कि न्यायाधीशों की नियुक्ति में एक विशेष विचारधारा से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी), महिलाओं, धार्मिक अल्पसंख्यकों तथा एलजीबीटी समुदाय का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं है। उनका कहना था कि न्यायपालिका में विविधता लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। उन्होंने अपने भाषण के दौरान संसदीय लोकतंत्र की स्थिति और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दों का भी उल्लेख किया। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने आपत्ति जताते हुए हंगामा शुरु कर दिया और कहा कि चर्चा विधेयक तक सीमित रहनी चाहिए। इसके बाद उपसभापति ने हस्तक्षेप करते हुए डॉ. मेनका गुरुस्वामी से केवल विधेयक से संबंधित बिंदुओं पर बोलने का आग्रह किया और असंबंधित टिप्पणियां रिकॉर्ड में न जाने देने की बात कही।
कौन हैं डॉ. मेनका गुरुस्वामी?
यहां बताते चलें कि डॉ. मेनका गुरुस्वामी देश की जानी-मानी संवैधानिक विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिवक्ता और शिक्षाविद हैं। वे भारत के सर्वोच्च न्यायालय में कई महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की पैरवी कर चुकी हैं। विशेष रूप से भारतीय दंड संहिता की धारा 377 को निरस्त कराने वाले ऐतिहासिक मामले में उनकी भूमिका व्यापक रूप से चर्चित रही। वे संविधान, मानवाधिकार और न्यायिक सुधार से जुड़े विषयों पर अपने विचारों के लिए जानी जाती हैं। हाल ही में उन्हें राज्यसभा का नामित सदस्य बनाया गया है, और बुधवार को वो अपना पहला भाषण उच्चसदन में दे रहीं थीं।