पट्ट विभूषण अभिषेक में गुरु के सामने छलके आंसू,
पुष्पदंत महाराज ने शिष्य प्रशांत सागर महाराज को दी ‘व्रत चक्रवर्ती पट्ट भूषण’ की उपाधि
देवास । मध्य प्रदेश के देवास जिले के सोनकच्छ स्थित पुष्पगिरी तीर्थ क्षेत्र में आयोजित एक विशाल समारोह में
जैन धर्म और साधना के इतिहास में एक ऐसा भावुक और गौरवपूर्ण अवसर देखने को मिला। जब आचार्य पुष्पदंत महाराज ने अपने शिष्य प्रशांत सागर महाराज को ‘व्रत चक्रवर्ती पट्ट भूषण’ की उपाधि से विभूषित किया। पट्ट विभूषण अभिषेक का यह समारोह आध्यात्मिक गरिमा और गुरु-शिष्य परंपरा के अद्भुत संगम का साक्षी बना।
समारोह में योग ऋषि, बाबा रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और प्रसिद्ध कथावाचक प्रदीप मिश्रा सहित अनेक गणमान्य लोग हजारों की संख्या में उपस्थित रहे। प्रशांत सागर महाराज के पट्ट अभिषेक के दौरान वातावरण भक्ति और भावनाओं से भर गया। गुरु के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए उनके आंसू छलक पड़े। यह दृश्य उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए भी अत्यंत भावुक क्षण बन गया।
इस अवसर पर बाबा रामदेव ने जैन साधना का कठोर तप, नियम एवं संयम की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा, उन्होंने चक्रवर्ती राजाओं के बारे में तो सुना और पढ़ा था, लेकिन “चक्रवर्ती साधु पहली बार देखा है ।” उनके इस कथन ने समारोह की आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ा दिया।
पट्ट भूषण की उपाधि केवल सम्मान का प्रतीक नहीं, बल्कि त्याग, संयम, तपस्या और व्रत के प्रति समर्पण की मान्यता के रूप में देखी गई। गुरु द्वारा शिष्य को इस उपाधि से अलंकृत किया जाना जैन परंपरा में गुरु-शिष्य संबंध की गहराई को भी दर्शाता है।
समारोह में धर्म, अध्यात्म और सामाजिक जीवन से जुड़े लोगों की उपस्थिति ने इसे विशेष बना दिया। श्रद्धालुओं ने इस अवसर को जैन साधना और भारतीय संत परंपरा का प्रेरणादायी अवसर बताया।

