वृंदावन आश्रम में रहस्यमयी मौत: संत समाज ने प्रेमानंद महाराज से माँगा स्पष्टीकरण

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मथुरा । वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के केली कुंज आश्रम से जुड़ी रहस्यमयी घटना ने पूरे संत समाज को झकझोर दिया है। जबलपुर के 25 वर्षीय रसिक दुलारी शरण, जो दीपक लोधी के नाम से भी जाने जाते थे, ने कथित तौर पर आश्रम के चौथे फ्लोर से कूदकर जान दे दी। हालांकि, उनके कमरे से ग्राइंडर मिलना और निजी अंग पर गंभीर चोट व कटे होने के निशान मौत और संदिग्ध बना रहे हैं। इस रहस्यमयी मौत पर अब वृंदावन के संत समाज ने गंभीर सवाल उठाए हैं और प्रेमानंद महाराज से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने को कहा है।
वृंदावन के महंत मोहिनी महाराज ने घटना पर कड़ी प्रतिक्रिया देकर परिवार को मृतक से मिलने न देने पर सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, कोई आदमी आत्महत्या करता है, तब प्राइवेट पार्ट क्यों काटेगा? आशंका जताकर उन्होंने इस सीधे-सीधे हत्या का मामला बताया और प्रेमानंद महाराज से तुरंत स्पष्टीकरण देने की अपील की। उनके अनुसार, प्रेमानंद जी की चुप्पी से गलत संदेश जा सकता है और संत समाज में घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। उन्होंने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से उच्चस्तरीय कमेटी गठित कर गहन जांच की मांग भी की है।
महानिर्वाणी अखाड़ा से जुड़े डॉक्टर हरिओम शरण महाराज ने भी प्रकरण पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि साधु समाज में आपस में कोई विरोध नहीं है, लेकिन एक साधु की इस तरह संदिग्ध मौत की पूरी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उन्होंने सीबीआई या एसआईटी जांच की आवश्यकता पर जोर देकर मृतक के गुप्तांग कटे होने और ऊपर से गिरने जैसी परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए। डॉक्टर शरण ने कहा कि प्रेमानंद महाराज के इर्द-गिर्द रहने वाले कुछ लोगों पर जमीन के कारोबार को लेकर सवाल उठते रहे हैं, और इन पहलुओं की जांच होनी चाहिए। उन्होंने प्रेमानंद महाराज से व्यक्तिगत रूप से इस मामले पर स्पष्टीकरण देने का आग्रह किया, क्योंकि आश्रम के प्रमुख को अपने परिसर और आसपास की गतिविधियों की जानकारी होनी चाहिए। इस पूरी घटना ने वृंदावन के आध्यात्मिक माहौल में एक गहरा प्रश्नचिह्न लगा दिया है। संत समाज एक स्वर में इस रहस्यमयी मौत की निष्पक्ष जांच और सच्चाई के खुलासे की मांग कर रहा है, ताकि साधु समाज की गरिमा बनी रहे और वृंदावन जैसे तीर्थ क्षेत्र में किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधियों पर अंकुश लग सके।
आशीष दुबे / 29 सितंबर 2026