-इन स्कैनरों का काम संदिग्ध या असामान्य वस्तु की पहचान में मदद करना होगा
नई दिल्ली । एयरपोर्ट पर यात्रियों की सुरक्षा जांच का तरीका बदलने की तैयारी है। देश के आठ एयरपोर्ट पर फुल बॉडी स्कैनर लगाए जाएंगे। इनमें से तीन एयरपोर्ट पर मशीनें पहुंच चुकी हैं, जबकि बाकी पांच एयरपोर्ट पर इन्हें जल्द लगाने की योजना है। इन मशीनों से जुड़े डेटा को इकट्ठा किया जा रहा है और उसका विश्लेषण भी किया जा रहा है। इस तकनीक का मकसद यात्रियों की सुरक्षा जांच को बेहतर बनाना है। फुल बॉडी स्कैनर को लेकर सबसे बड़ी चिंता प्राइवेसी की है। सरकार की ओर से बताया गया है कि ये स्कैनर तस्वीर पर निर्भर नहीं होंगे। इसका मतलब है कि स्क्रीन पर यात्री की असली तस्वीर नहीं दिखाई जाएगी। इसके बजाय शरीर का एक सामान्य मॉडल नजर आएगा। इससे सुरक्षा कर्मचारियों को यात्री की पहचान या शरीर की वास्तविक तस्वीर देखे बिना जांच करने में मदद मिलेगी। इस व्यवस्था का उद्देश्य सुरक्षा जांच और यात्रियों की निजता के बीच संतुलन बनाए रखना है। इन स्कैनरों का काम संदिग्ध या असामान्य वस्तु की पहचान में मदद करना होगा। स्क्रीन पर शरीर के मॉडल के उस हिस्से की जानकारी दिखाई देगी, जहां कोई संदिग्ध वस्तु मिलने की आशंका होगी। इसके बाद सुरक्षा कर्मचारी जरूरत के मुताबिक आगे की जांच कर सकेंगे।
स्कैनर के एल्गोरिदम को तैयार करने के लिए भारतीयों के आम पहनावे और रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली वस्तुओं से जुड़ा डेटा भी शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सामान्य वस्तुओं और संदिग्ध वस्तुओं के बीच अंतर पहचानने में मशीन की मदद करना है जैसे- कपड़ों या सामान्य इस्तेमाल की किसी वस्तु को गलत तरीके से संदिग्ध मानने की आशंका कम करने के लिए सिस्टम को प्रशिक्षित किया जाएगा। नागरिक उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक फ्लाईदुबई से जुड़ी घटना के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए भारत सुरक्षा के पहलुओं पर काम कर रहा है। मामले की जांच की जा रही है और जरूरत के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा भी हो रही है।
रिपोर्ट के मुताबिक नागरिक उड्डयन सचिव ने कहा कि यदि किसी एडवाइजरी की जरूरत होती है, तो इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को दी जाएगी उनके मुताबिक इस मामले में नीति के स्तर पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं होता कि फुल बॉडी स्कैनर लगाने का फैसला सीधे इसी घटना के कारण लिया गया है या यह अलग सुरक्षा योजना का हिस्सा है।

