हादसों से सीखे विमानन सुरक्षा के सबक
नई दिल्ली ।फ्लाईदुबई की एक उड़ान में भारतीय पायलट स्मित मच्छार और ओमान के सह-पायलट के बीच कॉकपिट में हुई कथित हाथापाई के बाद विमानन सुरक्षा से जुड़े नियमों पर चर्चा तेज हो गई है। इस घटना में पायलट की सूझबूझ से बड़ा हादसा टल गया। विमानन क्षेत्र में कॉकपिट सुरक्षा को लेकर लंबे समय से एक अहम व्यवस्था लागू है, जिसके तहत उड़ान के दौरान कॉकपिट में कम से कम दो क्रू सदस्यों की मौजूदगी सुनिश्चित की जाती है। ‘टू-पर्सन कॉकपिट रूल’ के तहत यदि मुख्य पायलट या सह-पायलट किसी कारण से कॉकपिट से बाहर जाता है, तो उसकी जगह एक केबिन क्रू सदस्य को अंदर मौजूद रहना होता है। इसका उद्देश्य कॉकपिट में अकेले रह गए पायलट की स्थिति में किसी आपात स्थिति से निपटना और सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना है।
इस व्यवस्था के पीछे कई सुरक्षा कारण हैं। यदि अकेले पायलट की तबीयत अचानक खराब हो जाए या वह बेहोश हो जाए, तो कॉकपिट में मौजूद दूसरा व्यक्ति आपात संदेश भेजने और जरूरी कार्रवाई करने में सक्षम हो सकता है। इसके अलावा, आधुनिक विमानों के कॉकपिट दरवाजे सुरक्षा कारणों से बेहद मजबूत और अंदर से लॉक होने वाले होते हैं। ऐसे में अंदर मौजूद अकेले व्यक्ति की स्थिति गंभीर सुरक्षा जोखिम पैदा कर सकती है। 2015 में जर्मनविंग्स की फ्लाइट 9525 दुर्घटना ने इस मुद्दे को खास तौर पर गंभीर बना दिया था। 24 मार्च 2015 को विमान के कप्तान के कॉकपिट से बाहर जाने के बाद सह-पायलट ने दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया और विमान को फ्रांस के आल्प्स क्षेत्र में पहाड़ से टकरा दिया। हादसे में विमान में सवार सभी 150 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद कॉकपिट में दो लोगों की मौजूदगी को लेकर विमानन सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा तेज हुई।
इससे पहले 2013 में मोजाम्बिक एयरलाइंस की फ्लाइट 470 भी दुर्घटनाग्रस्त हुई थी। जांच के अनुसार, सह-पायलट के कॉकपिट से बाहर जाने के बाद कप्तान ने दरवाजा अंदर से लॉक कर लिया था। विमान नामीबिया में दुर्घटनाग्रस्त हुआ और उसमें सवार सभी 33 लोगों की मौत हो गई थी। इसके अलावा सिल्क एयर फ्लाइट 185 और इजिप्ट एयर फ्लाइट 990 जैसी दुर्घटनाओं ने भी कॉकपिट में एक पायलट के अकेले होने से जुड़े जोखिमों पर सवाल उठाए। इन घटनाओं के बाद पायलटों की मानसिक स्वास्थ्य जांच और कॉकपिट सुरक्षा प्रक्रियाओं पर ज्यादा जोर दिया गया। भारत में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय ने भी कॉकपिट सुरक्षा को लेकर निर्धारित प्रक्रियाओं के पालन पर जोर दिया है। इसका उद्देश्य किसी तकनीकी खराबी, अचानक स्वास्थ्य संकट या मानवीय चूक की स्थिति में जोखिम को कम करना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

