वायरल होने की होड़ में खबर का सच न छूटे, जेन-जी पत्रकारिता पर मंथन

इंदौर

:: तीन दिवसीय भारतीय पत्रकारिता महोत्सव शुरू; माहेश्वरी बोले- कलम न रुके, न टूटे, न झुके; तिवारी ने कहा- हर वायरल वीडियो खबर नहीं ::
:: भारत, नेपाल और बांग्लादेश के विद्वान जुटे, 12 पत्रकारों को सप्तऋषि राज्य पत्रकारिता सम्मान ::
इंदौर । खबर को सबसे पहले वायरल करने की होड़ में कहीं खबर का सच पीछे न छूट जाए… सोशल मीडिया और एआई के दौर में पत्रकारिता के सामने खड़े इस सवाल पर शुक्रवार को इंदौर में मंथन हुआ। स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश के तीन दिवसीय भारतीय पत्रकारिता महोत्सव के शुभारंभ अवसर पर वक्ताओं ने रील, हैशटैग और वायरल वीडियो की दुनिया में तथ्य-पड़ताल, निष्पक्षता और जवाबदेही को पत्रकारिता की पहली कसौटी बताया। जाल सभागृह में हुए आयोजन में भारत के साथ नेपाल और बांग्लादेश के विद्वानों ने विचार रखे। देशभर से आए 150 से अधिक प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडियाकर्मियों ने सहभागिता की।
सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जे.के. माहेश्वरी ने कहा कि जेन-जी केवल उम्र का वर्ग नहीं, बल्कि एक विचार और मानसिकता है। आज की पीढ़ी रील और हैशटैग के जरिए अपनी बात रख रही है। ऐसे में यह देखना जरूरी है कि उसकी अभिव्यक्ति कितनी विश्वसनीय, प्रमाणिक और उपयोगी है। उन्होंने युवा पत्रकारों से जिज्ञासा, साहस और जवाबदेही को पत्रकारिता का आधार बनाने का आह्वान किया।
:: कलम न रुके, न टूटे, न झुके : माहेश्वरी
माहेश्वरी ने कहा कि संविधान ने सभी को अपनी बात कहने का अधिकार दिया है। पत्रकारों की कलम न रुकनी चाहिए, न टूटनी चाहिए और न झुकनी चाहिए। कलम की धार ऐसी होनी चाहिए कि समाज में बदलाव आए। जेन-जी की आवाज अंतिम व्यक्ति की आवाज बने। पत्रकारिता के तथ्य पवित्र होने चाहिए और गलती होने पर माफी मांगने का साहस भी होना चाहिए। उन्होंने युवा पत्रकारों से अपनी बात निर्भीकता और निष्पक्षता से रखने का आह्वान किया।
एआई को लेकर उन्होंने कहा कि यह एक टूल है, लेकिन मानवीय बुद्धि और विवेक उसके नियंत्रण में न आए, इसका ध्यान रखना जरूरी है।
:: हर वायरल वीडियो खबर नहीं : तिवारी
माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय के कुलगुरु विजय मनोहर तिवारी ने कहा कि जेन-जी की अवधारणा पश्चिमी सोच का परिणाम है। भारतीय समाज में नामकरण एक संस्कार है और उसका विशेष महत्व है। केवल उम्र के आधार पर समाज को जेन-जी या जेन-अल्फा जैसे खांचों में बांटना पर्याप्त नहीं है।
उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल कंटेंट की विश्वसनीयता को लेकर पत्रकारों को सावधान किया। तिवारी ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान वायरल हुए कई कंटेंट और वीडियो फर्जी पाए गए। बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी फर्जी वीडियो सामने आए। मोबाइल के जरिए सूचना प्रसारित करना और पत्रकारिता करना एक बात नहीं है। हर कंटेंट और हर वीडियो पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं किया जा सकता।
तिवारी ने कहा कि यदि 2047 में भारत को विकसित राष्ट्र के रूप में देखना है तो समाज को अवकाश संस्कृति से बाहर निकलकर अधिकाधिक कार्य करने की दिशा में बढ़ना होगा।
:: राष्ट्रीय पत्रकारिता नीति की जरूरत : लाहिड़ी
फेडरेशन ऑफ प्रेस क्लब्स के अध्यक्ष गौतम लाहिड़ी ने कहा कि भारत युवा देश है और 35 वर्ष से कम उम्र के लोगों की संख्या बड़ी है। देश के नीति-निर्माण में युवाओं की भूमिका होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत में राष्ट्रीय पत्रकारिता नीति नहीं होने के कारण पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर लगातार मांग उठती रहती है।
मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मीडिया में विश्वास के संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में खबरें फेक न्यूज साबित हो रही हैं, जो चिंता का विषय है। उन्होंने आरोप लगाया कि मीडिया की भूमिका सीमित होती जा रही है तथा संवैधानिक संस्थाओं और विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है।
सार्क मीडिया फोरम के अध्यक्ष एवं नेपाल के राजू लामा ने भारत-नेपाल संबंधों को युगों पुराना बताते हुए कहा कि नेपाल भारत से अलग नहीं है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और महात्मा गांधी के योगदान का उल्लेख किया। लामा ने कहा कि भारत को विश्वगुरु बनने के लिए एआई के साथ सुपर स्पेशियलिटी के क्षेत्रों पर भी काम करना चाहिए।
बांग्लादेश के अब्दुर रहमान ने भारतीय पत्रकारिता महोत्सव को महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि यहां से उठने वाली बातें पूरे देश तक पहुंचेंगी। फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट प्रेस क्लब, नई दिल्ली के महासचिव प्रकाश नंदा ने उपभोक्तावादी संस्कृति के प्रभाव का उल्लेख करते हुए जेन-जी और जेन-अल्फा जैसे वर्गीकरणों पर विचार करने की जरूरत बताई।
:: 200 वर्ष की पत्रकारिता यात्रा के पुरोधाओं का स्मरण ::
स्टेट प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल ने कहा कि अपने समय की आवाज को सुनना और उसे जनहित में व्यक्त करना पत्रकारिता का धर्म है। उन्होंने बताया कि क्लब का यह 18वां सत्र है। पिछले वर्ष महोत्सव का केंद्र एआई था और इस बार जेन-जी को केंद्र में रखा गया है।
खारीवाल के अनुसार तीन दिवसीय महोत्सव में जेन-जी से जुड़े छह सत्र, भावी पत्रकारों के लिए तीन विशेष मास्टर क्लास और चार सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उनके योगदान का स्मरण किया जा रहा है। पत्रकारिता के 200 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पत्रकारिता के पुरोधाओं और देशहित में विशिष्ट भूमिका निभाने वाले पत्र-पत्रिकाओं को भी याद किया जाएगा।
:: 12 पत्रकारों को सप्तऋषि सम्मान ::
उद्घाटन समारोह में मध्यप्रदेश के 12 मीडियाकर्मियों को सप्तऋषि राज्य पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित किया गया। इनमें गिरिश उपाध्याय, प्रकाश भटनागर, देशदीप सक्सेना, शरद द्विवेदी, सुधीर दीक्षित, प्रभु पटैरिया, शिफाली, श्रुति तोमर, राजेश शर्मा, शशिकांत त्रिवेदी, भावना शुक्ला और पंकज शुक्ला शामिल हैं।
कार्यक्रम में स्टेट प्रेस क्लब के अध्यक्ष प्रवीण खारीवाल, मुख्य महासचिव नवनीत शुक्ला, उपाध्यक्ष घनश्याम पटेल, संरक्षक रचना जौहरी, कोषाध्यक्ष सोनाली यादव, वुमंस प्रेस क्लब, मध्यप्रदेश की अध्यक्ष शीतल राय और सुदेश गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया। प्रतीक चिह्न संजीव श्रीवास्तव, शकील अख्तर और पुष्कर सोनी ने प्रदान किए। संचालन पंकज क्षीरसागर ने किया और आभार घनश्याम पटेल ने व्यक्त किया।