इन्दौर | जलसंकट की आशंका के एहतियात बतौर इन्दौर कलेक्टर द्वारा नए बोरवेल पर लगाई गई रोक के आदेश के खिलाफ मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में एक जनहित याचिका रितेश मंडलोई द्वारा दायर कर मांग की है कि शहर में पानी की वास्तविक उपलब्धता का पता लगाने के लिए विशेषज्ञों की एक टीम गठित की जाए। विभिन्न क्षेत्रों में पानी की निगरानी की जाए। कलेक्टर द्वारा नए बोरवेल पर लगाई गई रोक के आदेश को निरस्त किया जाए। याचिकाकर्ता के एडवोकेट विशाल बाहेती के अनुसार याचिका में कहा गया है कि बगैर किसी सर्वे और ठोस आधार के कलेक्टर ने बोरवेल खनन पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया। इस आदेश को जारी करने से पहले न कोई सर्वे किया न ही किसी तरह की व्यवस्था की गई। आज भी शहर के बड़े हिस्से में नर्मदा लाइन नहीं है। वहां रहने वाले लोग बोरवेल के पानी पर ही निर्भर है। यहां जलापूर्ति को लेकर कोई योजना नहीं है। जनता की सहूलियत को ध्यान रखे बगैर कदम उठाया गया। याचिका में कहा गया है कि नए बोरवेल पर रोक लगाना कोई विकल्प नहीं है। शासन के आंकड़े ही बता रहे हैं कि जिले के 45 प्रतिशत बताया हिस्से में आज भी नर्मदा लाइन नहीं है। नए बोरवेल नहीं होंगे तो इन क्षेत्रों में जलापूर्ति कैसे होगी? एक तरफ नए बोरवेल पर रोक लगा दी गई, दूसरी तरफ होटलों में स्विमिंग पूल चल रहे हैं। नगर निगम खुद नेहरू पार्क, तरण पुष्कर स्विमिंग पुलों का संचालन कर रहा है। इसके अलावा निजी और शासकीय निर्माणों पर कोई रोक नहीं है। ये बगैर किसी रोक-टोक के धड़ल्ले से चल रहे हैं। फिलहाल याचिका रजिस्टर्ड हो गई है।

