एमबीबीएस की सीटें बढाकर 250 करने का मामला अटका

एमसीआई की बडी लापरवाही हुई उजागर
भोपाल । राजधानी के गांधी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) में एमबीबीएस की 150 सीटों को बढ़ाकर 250 करने का मामला अटक गया है। इसके पीछे मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) की बड़ी लापरवाही सामने आई है। कॉलेज की एमबीबीएस की 150 सीटों की अनुमति का पत्र (लेटर ऑफ परमिशन-एलओपी) इस साल कॉलेज प्रबंधन को अप्रैल में मिला, जबकि मान्यता के लिए आवेदन मार्च तक करना था। कॉलेज प्रबंधन ने मान्यता के लिए आवेदन तो कर दिया था, पर एमसीआई ने एलओपी में देरी के चलते मान्यता देने से मना कर दिया है। इससे छात्रों का बड़ा नुकसान हुआ है। दरअसल, अभी तक जीएमसी भोपाल में एमबीबीएस की सीटें 140 थीं। पांच साल पहले भारत सरकार ने सीटें 140 से बढ़ाकर 150 कर दीं। 10 सीटें बढ़ाने के बाद एमसीआई ने पांच साल तक लगातार कॉलेज का निरीक्षण किया और सीटें बढ़ाने की अनुमति दी। पांच साल बाद स्थायी तौर पर सीटें बढ़ाने के संबंध में एलओपी जारी किया। यह पत्र समय पर नहीं मिलने की वजह से कॉलेज प्रबंधन समय पर आवेदन नहीं कर पाया। एमसीआई ने आवदेन करने के पहले एक और पत्र कॉलेज प्रंबंधन को भेजा था। इसमें कहा गया था कि गांधी मेडिकल कॉलेज से संबद्घ हमीदिया और सुल्तानिया अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की रोजाना संख्या 3 हजार से कम है, इसलिए कॉलेज आवेदन करने के पात्र नहीं है।
बता दें कि पिछले साल हमीदिया अस्पताल की रोजाना की औसत ओपीडी 2477 थी। सुल्तानिया अस्पताल की रोजाना की ओपीडी करीब 300 है। इस तरह करीब 200 मरीज कम पड़ रहे हैं। हालांकि, कॉलेज के अधिकारियों का कहना है कि इस साल ओपीडी बढ़ गई है। ऐसे में समय पर आवेदन पहुंच जाता तो ओपीडी की अड़चन नहीं आती। सीटें बढ़ाने के लिए कॉलेज की दो विंग बढ़ाई जा रही हैं। यह कॉलेज के अन्य विंग की तरह पांच मंजिला है। इनमें 250 सीट वाले लेक्चर हॉल, सभी लैब, डिसेक्शन कक्ष आदि हैं। कॉलेज भवन तैयार करने की समय सीमा जून 2019 और अस्पताल भवन की अगस्त 2019 है। अस्पताल में 250 सीटों के लिहाज से एक बड़ा लेक्चर हाल, मरीजों के लिए सुविधाएं व उपकरण जरूरी हैं। भोपाल के अलावा, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की सीटें 150 से बढ़ाकर 250 की जानी हैं। रीवा में एमबीबीएस सीटें 100 से बढ़ाकर 150 की जानी हैं। तीन साल पहले यह सीटें बढ़ जानी थीं। सीटें बढ़ाने के लिए जरूरी संसाधन जुटाने में देरी के चलते अब तक सीटें नहीं बढ़ पाई हैं। संसाधन जुटाने के लिए भारत सरकार भी सहयोग कर रही है। सभी कॉलेजों में प्रति सीट करीब एक करोड़ रुपए खर्च आ रहा है। इसके लिए 60 फीसदी राशि भारत सरकार दे रही है।
सुदामा नर-वरे/16मई2019