घोषणापत्र

लघुकथा       ऑफिस में हड़कंप मचा हुआ था। मालिक ने रिटायर होनेवाले कर्मचारियों को पेंशन देने के…

पिल्ला पीहर का

     यूँ तो जीव-प्रेम के लिए पूरा शहर जे पी को बखूबी जानता था। उन्हें  गली-मोहल्ले, यहाँ-वहाँ, …

टिफिन

  “एक तो इतनी देर से आई .. ऊपर से गेट भी खुला छोड़ गयी महारानी.. अब…

बाल कथा- “पानी और आसमान”

कुछ देर पहले ही खूब बारिश हो कर निपटी है। जगह जगह गड्ढे पानी से लबालब…

भविष्य

“बताइए भैया! कौन सी किताब चाहिए? यहाँ कक्षा तीन से लेकर स्कूल-कॉलेज एवं प्रतियोगी पुस्तकें मिलती…

समीक्षा

मानवीय संवेगों की यथार्थ अभिव्यक्ति की विवशता का संग्रह ‘आई समटाइम्स थिंक दैट पीपल्स हार्ट्स आर…

अपने लिये कब

कॅरोना संकट में अच्छे बड़े परिवार की आर्थिक स्थिति संकट में आ पड़ी तो गरीबों की…

धूप वाला कोना……

                            तब माँ ज़िन्दा थीं । चलने फिरने में बहुत मुश्किल होने लगी थी । फिर भी…

” विषाक्त “

सुंदर सी धरती पर नेक, भले, प्यारे प्यारे लोग रहते थे .उन्हीं के बीच न जाने…

पेंशन

वह  इतने ज़ोर से चिल्लाई थी कि मैं सकपका गया । अपने जवान बेटे को गालियाँ …