इतनी खामोश हवाएं क्यों है ? इतनी खामोश हवाएं क्यों है, इतनी गमगीन फिजाएं क्यों है।…
Category: काव्य ग़ज़ल
अश्वत्थामा मरा नहीं
अश्वत्थामा सदा भ्रम में जिया जब उसके निर्धन पिता द्रोण ने आटे का घोल दिया अश्वत्थामा…
हम कब होगें आजाद दोस्तो
सुनता नहीं कोई फरियाद दोस्तो। हम कब होगें आज़ाद दोस्तो। कैसे रूक सकती है बेरोज़गारी। चोरों…