शब्द

**** क्यों खामोश हैं तुम्हारे शब्द कोई आवाज़ नहीं आ रही एक लंबे अंतराल से क्यों…

महाभारत फिर एक बार

फिर एक बार महाभारत हो रहा है  नैतिकता अपना वजूद खो रहा है सबको जागते रहो…

– मणिपुर के बाद बंगाल

 धृतराष्ट्र  देख नहीं सकता था  अंधा था  और जो कुछ देखा  दूसरे की आंखों से दूसरे…

   मणिपुर

द्रौपदी भीड़ में है नग्न हमारी ! कौरव कुल करता यह नर्तन है!! सत्ता की मौन…

सुन लाडली मेरी,

तुझे जीवन का पाठ पढ़ाते है। लक्ष्मी नहीं……….सीता नहीं  तुझे चंडी रुप में हम बुलाते है…

अंधेरा चीखा सारी रात

उमड़ घुमड़ कर बादल बरसे, बिजली तड़की सारी रात । सांय सांय कर चली हवाएं, बैचेन…

सच झूठ का भेद

सच का मुँह झूठ की आँख क्या देखी है कभी। सच का रुख झूठ का रुख…

मैं तुम्हे मिलूंगी……..

बर्षा की टपकती बूंदों में मिट्टी की सोंधी महक में खिलते हुए फूलों मे गुनगुनाती हुए…

सवेरों की तलाश में

कई जिंदगियां भटक रही हैं सवेरों की तलाश में   उधर उजाले भी थक चुके अंधेरों की…

Educate The Girl

Save the girl, educate the girl This slogan is still ringing Still why?? For what reason?…