(भोपाल) 400 स्मार्ट पोल में से लगे मात्र 150

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योजना में शामिल सुविधाओं का नहीं मिल रहा लाभ
भोपाल (ईएमएस)। राजधानी की सडकों पर स्मार्ट पोल लगाने योजना में अब तक पीपीपी मोड पर पहले फेस 400 में से 150 पोल लगाए गए हैं। इस योजना के तहत 640 करोड़ रुपए का बजट खर्च होना है। योजना में शामिल जिन सुविधाओं का लाभ लोगों को मिलना था वह अब तक सिर्फ कागजों में दी जा रही हैं। एक ओर स्मार्ट पोल पर स्मार्ट सिटी कंपनी अवार्ड हासिल कर रही है वहीं इन पोल से दी जाने वाली सुविधाओं के दावे खोखले साबित हो रहे है। सूत्रों की माने तो दो साल पहले स्मार्ट पोल प्रोजेक्ट का काम शुरू किया गया था। शहर में कई ऐसे स्थान हैं जहां कई खंभे लगे हुए हैं। अब एक स्मार्ट पोल भी लगा है तो दूसरे पर हाईमास्ट या स्ट्रीट लाइट लगी है। हद तो यह है कि अधिकांश स्थानों पर स्मार्ट पोल के अलावा चार खंभे अलग-अलग सुविधाओं के लिए अब भी खड़े हैं। जबकि ये सभी सुविधाएं एक ही स्मार्ट पोल पर होनी चाहिए। खास बात यह है कि इनकी लोकेशन भी सेंट्रल वर्ज पर नहीं रखी गई। कोलार, बिट्टन मार्केट, अयोध्या बायपास में स्मार्ट पोल सड़क किनारे लगा दिए गए हैं, जबकि यह सेंट्रल वर्ज पर लगने चाहिए। अधिकांश स्मार्ट पोल में पूर्व निर्धारित सेवाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। इतना ही नहीं बल्कि तकनीकी खराबियां भी एक बड़ी समस्या है। जानकारी के अनुसार दिशासूचक बोर्ड, विज्ञापन बोर्ड मोबाइल टावर,मौसम की जानकारी, प्रदूषण डिस्प्ले बोर्ड, चार्जिंग पॉइंट और वाई-फाई की सुविधा नहीं दी जा रही है। दिल्ली में बीते 1 दिसंबर को भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड के स्मार्ट पोल प्रोजेक्ट को बेस्ट पीपीपी अवार्ड मिला है। एक निजी होटल में आयोजित बिजनेस वर्ड के छठे स्मार्ट सिटीज कॉन्क्लेव एंड अवार्ड कार्यक्रम में दिया गया। स्मार्ट सिटी कंपनी को अवार्ड देश के सर्वश्रेष्ठ पब्लिक प्राइवेट पाटर्नरशिप प्रोजेक्ट (पीपीपी) के लिए मिला है।
भोपाल स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीएसलीडीसीएल)द्वारा पीपीपी मोड पर शहर में स्मार्ट पोल लगाए गए हैं। इसमें बताया गया कि करोड़ों के इस प्रोजेक्ट में स्मार्ट सिटी का अब तक एक रूपए भी खर्चा नहीं हुआ है। शहर में ज्यादा पोल होने से चौराहों पर ट्रैफिक प्रभावित हो रहा है। पोल से चौराहों में जगह कम हो गई है। विशेषज्ञों के मुताबिक जितने ज्यादा पोल होंगे, उतना ही लोगों का ड्राइविंग से ध्यान भटकेगा। अलग-अलग पोल होने से स्मार्ट पोल को विज्ञापन से होने वाली आय भी कम होगी। स्मार्ट पोल के लिए बीएससीडीसीएल ने नगर निगम व ट्रैफिक पुलिस के साथ मिलकर प्लानिंग नहीं की गई। नगर निगम ने अलग टेंडर निकाल कर गेंट्री के लिए पोल खड़े करवा दिए। जबकि ट्रैफिक पुलिस ने सिग्नल व सीसीटीवी के लिए पोल खड़े किए हैं। अब स्मार्ट सिटी कंपनी अलग से चिन्हित स्थानों पर स्मार्ट पोल लगा रही है। बीते पांच साल में नगर निगम व उर्जा विकास निगम ने शहर में 7 हजार से ज्यादा स्ट्रीट लाइट में सोडियम वेपर लैंप को बदलकर एलईडी लाइट लगाई हैं। अब 18 हजार स्मार्ट स्ट्रीट लाइट्स में से 10 हजार में नई एलईडी भी लग गई हैं। अहम बात यह कि निगम ने इनके लिए जिन पुरानी फिटिंग को निकाला है, उनका कोई रिकॉर्ड नहीं है। वहीं वर्ष 2013 में एलईडी लगने के बाद भी नगर निगम ने बीआरटीएस में पांच करोड़ रुपए से सोडियम वेपर लैंप लगा दिए। महज दो साल बाद ही इन्हें बदलकर एलईडी लगाई गई हैं। इस बारे में बीएससीडीसीएल सीईओ संजय कुमार का कहना है कि स्मार्ट पोल में कई सुविधाएं दी जा रही हैं। हो सकता है कि तकनीकी खराबी के कारण एक-दो पोल में कुछ सेवाए प्रभावित हो हुई हो। पूरे प्रोजेक्ट का सही तरीके से संचालन किया जा रहा है। जो सेवाएं स्मार्ट पोल में तय की गई हैं वह दी जा रही है।
सुदामा/14दिसंबर2018

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